Sunday, May 31, 2026

‘पानी पूरी बेचते हैं’, मंत्री एमआरके पन्नीरसेल्वम के बयान पर एनडीए ने किया पलटवार

तिरहुत डेस्क (नई दिल्ली)। तमिलनाडु सरकार में मंत्री एमआरके पन्नीरसेल्वम ने उत्तर भारतीयों को लेकर विवादित बयान दिया। उन्होंने कहा कि उत्तर भारतीय तमिलनाडु आकर टेबल साफ करने, मजदूरी करने या पानी पूरी बेचने जैसे काम करते हैं। मंत्री के इस बयान पर एनडीए नेताओं ने पलटवार किया है।

जदयू सांसद संजय कुमार झा ने कहा कि उत्तर भारत के लोग, खासकर बिहार और यूपी के लोग, जहां भी गए हैं, वहां की स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है। आज अगर उत्तर भारत के लोग एक दिन के लिए भी काम करना बंद कर दें, तो वहां की अर्थव्यवस्था ठप हो जाएगी। इसके उलट दक्षिण भारत और अन्य इलाकों के लोग आम तौर पर विदेश, गल्फ या कहीं और काम करने नहीं जाते। यह बात इंडी गठबंधन को, खासकर कांग्रेस को बतानी चाहिए। डीएमके के इस बयान पर कांग्रेस क्या कहती है। कांग्रेस गठबंधन के लोग यूपी-बिहार के लोगों के प्रति हीन भावना रखते हैं। संविधान को पॉकेट में लेकर घूमते हैं। संविधान कहता है कि कोई भी व्यक्ति देश में कहीं भी जाकर काम कर सकता है।

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि तमिलनाडु में सरकार कांग्रेस चला रही है और वे उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और अन्य राज्यों के लोगों के खिलाफ अभद्र टिप्पणियां कर रहे हैं। राहुल गांधी को इसका जवाब देना चाहिए। क्या वे देश में बंटवारा करने की कोशिश कर रहे हैं? कांग्रेस विभाजनकारी पार्टी बनती जा रही है, पाकिस्तान और चीन की भाषा बोलने वाली पार्टी बनती जा रही है। यह असंसदीय पार्टी बनती जा रही है।

उन्होंने कहा कि एक अबोध बालक की वजह से संसद को बंधक बना लिया गया है। उस अबोध बालक का नाम इतिहास के पन्नों में काले अक्षरों में लिखा जाएगा।

दूसरी तरफ, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि कुछ नेता सिर्फ सुर्खियों में बने रहने के लिए ऐसे बयान देते हैं। एनडीए सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘सबका साथ, सबका विकास’ के सिद्धांत पर आगे बढ़ रही है। ऐसे बयान देश की सोच और दिशा को नहीं बदल सकते।

भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने डीएमके मंत्री के बयान को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, “हमारे देश का मूल मंत्र विविधता में एकता है। इस तरह के ऊंचे राजनीतिक पदों से दिए गए बयान बहुत नकारात्मक सोच को दिखाते हैं।”

उन्होंने आरोप लगाया कि डीएमके और उसके सहयोगी जानते हैं कि वे चुनाव में बुरी तरह हारने वाले हैं, इसलिए आखिरी कोशिश के तौर पर समाज में निराशा और उत्तर-दक्षिण के बीच विभाजन फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।

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