Monday, June 1, 2026

लालू परिवार की अनुपस्थिति में सरकारी बंगला खाली, जदयू ने भवन विभाग से जांच की मांग की

तिरहुत डेस्क (नई दिल्ली)। बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की अनुपस्थिति में उनका आवंटित 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास खाली करने को लेकर जदयू ने सवाल उठाए हैं। जदयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने इसे लेकर भवन निर्माण विभाग के मंत्री को एक पत्र भी लिखा है, जिसमें कई सवाल पूछे गए हैं और कई आशंकाओं को लेकर आगाह किया है।

जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने पत्र में कहा कि मीडिया स्रोतों से प्राप्त जानकारी के अनुसार उक्त सरकारी आवास को राबड़ी देवी एवं उनके परिवार की अनुपस्थिति में खाली किया जा रहा है। मीडिया में यह भी प्रकाशित, प्रसारित हुआ है कि रात्रि के समय पिकअप वैन के माध्यम से उक्त आवास परिसर से गमले एवं पौधे बाहर ले जाए गए हैं। ऐसे में विभाग यह साफ करे कि आवास परिसर में लगे गमले एवं पौधे उद्यान विभाग की संपत्ति हैं अथवा निजी। यदि वे उद्यान विभाग की संपत्ति हैं, तो किसके आदेश एवं अनुमति से उन्हें पिकअप वैन द्वारा हटाया गया।

उन्होंने यह भी सवाल किया कि राबड़ी देवी और उनके परिवार की अनुपस्थिति में किसके निर्देश पर पिकअप वैन को आवास परिसर में प्रवेश की अनुमति दी गई। बिहार के दो पूर्व मुख्यमंत्री, लालू यादव एवं राबड़ी देवी, का परिवार वर्ष 2006 से उक्त सरकारी आवास में निवासरत रहे हैं।

पत्र में जदयू नेता ने आगे लिखा है, “विभाग का यह दायित्व है कि आवास खाली किए जाने के दौरान यह सुनिश्चित किया जाए कि पंखा, एसी, फर्नीचर, बाथरूम फिटिंग, टोंटी, गीजर, शौचालय में लगा कमोड, खिड़की-दरवाजों के पर्दे सहित अन्य सभी सरकारी सामग्री पूर्णतः सुरक्षित एवं यथास्थान उपलब्ध हो।”

उन्होंने आगे कहा है कि विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव द्वारा पूर्व में भी निराधार आरोप लगाए जाते रहे हैं। ऐसी स्थिति में जब राबड़ी देवी एवं उनका परिवार आवास में उपस्थित नहीं है और उनकी अनुपस्थिति में आवास खाली किया जा रहा है, तो भविष्य में यह आरोप लगाया जा सकता है कि सरकारी सामग्री उनके द्वारा नहीं बल्कि विभागीय लापरवाही या किसी साजिश के तहत हटाई गई, जिससे अनावश्यक राजनीतिक विवाद उत्पन्न हो सकता है।

पत्र के अंत में नीरज कुमार ने विभाग से आग्रह करते हुए कहा, “भवन निर्माण विभाग द्वारा संपूर्ण प्रक्रिया की विधिवत निगरानी कराई जाए, सभी परिसंपत्तियों का भौतिक सत्यापन कराया जाए और आवश्यकतानुसार विधिवत दस्तावेजीकरण भी सुनिश्चित किया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार के भ्रम, आरोप या राजनीतिक दुष्प्रचार की कोई गुंजाइश न रहे।”

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