Sunday, May 31, 2026

कश्मीरी अलगाववादी आसिया अंद्राबी को मिली सजा पर पाकिस्तान का छलका दर्द

तिरहुत डेस्क (नई दिल्ली)। दिल्ली की एक अदालत ने कश्मीरी अलगाववादी नेता और प्रतिबंधित संगठन ‘दुख्तरान-ए-मिल्लत’ की प्रमुख आसिया अंद्राबी को यूएपीए मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने अंद्राबी को प्रतिबंधित संगठन का नेतृत्व करने और भारत के विरुद्ध युद्ध छेड़ने की साजिश रचने का दोषी पाया है। इस फैसले पर पाकिस्तान की कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है, जहां सरकार ने इस न्यायिक निर्णय की निंदा की है, जो भारत के आंतरिक मामलों में उसके निरंतर हस्तक्षेप को दर्शाता है।

बता दें, इस मामले में दिल्ली कोर्ट ने आसिया अंद्राबी और उनकी दो साथियों, सोफी फहमीदा और नाहिदा नसरीन को 30-30 साल की सजा सुनाई है। पाकिस्तान ने आसिया अंद्राबी, फहमीदा सोफी और नाहिदा नसरीन को दी गई सजा की निंदा की। इसके अलावा एक बार फिर से पुराना राग अलापते हुए पाकिस्तान ने जम्मू और कश्मीर में मानवाधिकारों पर अंतरराष्ट्रीय ध्यान देने की मांग की।

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “पाकिस्तान, दिल्ली की एक अदालत द्वारा कश्मीर की एक जानी-मानी नेता आसिया अंद्राबी को उम्रकैद की सजा और उनकी दो साथियों, फहमीदा सोफी और नाहिदा नसरीन को कठोर कानून, गैर-कानूनी गतिविधियों (प्रिवेंशन) एक्ट के तहत दी गई 30 साल की सजा को पूरी तरह से खारिज करता है। यह फैसला इंसाफ की एक बड़ी गलती है और जम्मू और कश्मीर में बुनियादी अधिकारों के लगातार दमन को दिखाता है।”

पाकिस्तान शुरुआत से ही भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने की कोशिशों में लगा रहता है। बची हुई कसर वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप की मांग कर पूरी कर लेता है। विदेश मंत्रालय की ओर से ताजा टिप्पणी भी यही दिखाती है कि पाकिस्तान अपने देश की गिरती हुई अर्थव्यवस्था को संभाल नहीं पा रहा, लेकिन उसका पूरा ध्यान भारत है।

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने आगे लिखा, “पाकिस्तान इस फैसले को राजनीतिक रूप से प्रेरित मुकदमों के एक बड़े पैटर्न का हिस्सा मानता है, जिसका मकसद अलग राय रखने वालों की आवाजों को दबाना और कश्मीरी लोगों के जायज अधिकारों की वकालत करने वालों को डराना है। यह सजा सही प्रक्रिया, न्यायिक आजादी और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों की जिम्मेदारियों के पालन को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करती है।”

पाकिस्तान का कहना है कि आसिया अंद्राबी लंबे समय से कश्मीर मुद्दे की मुखर समर्थक रही हैं। उनकी सजा और सख्त सजा जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक प्रतिक्रिया और नागरिकों की छूट के लिए कम होती जगह को दिखाती है। पाकिस्तान का मानना ​​है कि इस तरह की हरकतें तनाव को और बढ़ाती हैं और दक्षिण एशिया में शांति और स्थिरता की उम्मीदों को कमजोर करती हैं।

ईरान की ओर से पश्चिम एशिया में जारी हमलों पर चुप्पी साधने वाले पाकिस्तान का मानना है कि भारत में कानूनी तौर पर सिद्ध दोषी को सजा देने से पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता को कमजोर करती है। पाकिस्तान इस तरह के बयान देकर अक्सर विश्व पटल पर फजीहत करवाता रहता है।

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