Sunday, May 31, 2026

झारखंड विधानसभा में कानून व्यवस्था और भ्रष्टाचार को लेकर विपक्ष का हंगामा

तिरहुत डेस्क (नई दिल्ली)। झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दसवें दिन मंगलवार को विपक्ष ने राज्य की कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर जबर्दस्त हंगामा किया। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही भारतीय जनता पार्टी के विधायक हाथों में पोस्टर लेकर वेल में पहुंच गए और राज्य में बढ़ते भ्रष्टाचार व बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर चर्चा की मांग करने लगे।

हंगामे के दौरन सदन में स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब आजसू पार्टी के विधायक निर्मल महतो को स्पीकर ने मार्शल आउट करा दिया। हालांकि बाद में सदन में बनी सहमति के बाद उन्हें वापस बुला लिया गया। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि राज्य में भ्रष्टाचार चरम पर है और बिना पैसे के कोई काम नहीं हो रहा है।

उन्होंने कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए दुमका में मजदूर यूनियन नेताओं पर हुई गोलीबारी, रजरप्पा मंदिर में श्रद्धालु के साथ पुलिसकर्मियों की मारपीट और गिरिडीह में महिला दिवस के कार्यक्रम के दौरान उपायुक्त द्वारा महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित बदसलूकी की घटना जिक्र किया।

मरांडी ने तीखा तंज कसते हुए कहा कि यह ‘अबुआ सरकार’ (जनता की सरकार) नहीं, बल्कि पूरी तरह ‘बबुआ सरकार’ (अफसरों की सरकार) बन गई है, जहां अपराधी बेखौफ हैं और अधिकारी बेलगाम। उन्होंने इन मुद्दों पर सदन के अन्य कार्यों को रोककर विस्तृत चर्चा की मांग की। विपक्ष के आरोपों पर पलटवार करते हुए वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में है और सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है।

उन्होंने विपक्ष को चुनौती दी कि यदि उनके पास कोई विशेष मामला है तो उसे सदन के पटल पर रखें, सरकार कार्रवाई के लिए तैयार है। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सदन नियमों से चलता है और कार्यमंत्रणा समिति में तय विषयों पर ही चर्चा संभव है। बहस के दौरान सदन में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब सत्ता पक्ष के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू और विधायक निर्मल महतो के बीच सीधी नोकझोंक शुरू हो गई।

विवाद इतना बढ़ा कि विधानसभा अध्यक्ष ने कड़ी नाराजगी जताते हुए तिवारी महतो को मार्शल आउट करने का निर्देश दे दिया, जिसके बाद उन्हें सदन से बाहर ले जाया गया। हालांकि, सदन की गरिमा को देखते हुए बाद में वित्त मंत्री के हस्तक्षेप और विपक्षी सदस्यों के अनुरोध पर उन्हें वापस सदन में बुला लिया गया। इस दौरान काफी देर तक पक्ष और विपक्ष के विधायक एक-दूसरे के आमने-सामने डटे रहे।

यह भी पढ़े: संसद में हंगामे के बीच विपक्ष का सरकार पर हमला, किसानों व अंतरराष्ट्रीय हालात पर चर्चा की मांग

Related Articles

Stay Connected

7,268FansLike
10FollowersFollow

Latest Articles