Monday, June 1, 2026

परीक्षा पे चर्चा : छात्र के सवाल पर पीएम मोदी का जवाब , “बिहार का लड़का राजनीति की बात न करे हो ही नहीं सकता”

तिरहुत डेस्क (नई दिल्ली)। ‘परीक्षा पे चर्चा’ के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बच्चों ने कुछ सवाल भी किए, जिसका उन्होंने सहज अंदाज में जवाब दिया। पीएम मोदी ने बच्चों को तनाव मुक्त रहने का मंत्र तो दिया ही, साथ ही माहौल को सामान्य भी बना दिया। ऐसा ही एक क्षण तब आया जब बिहार के विराज ने एक सवाल किया!

विराज ने प्रधानमंत्री से एक सवाल किया, “आप इतने बड़े ग्लोबल लीडर हैं और कई बड़े पदों पर रहे हैं। आप हमसे दो-तीन ऐसी बातें शेयर कीजिए, जो आपसे संबंधित हों और जो हमें बच्चों को आगे बढ़ने में मदद करें?”

इस पर प्रधानमंत्री मोदी ने हंसते-मुस्कुराते हुए कहा, “बिहार का लड़का हो और राजनीति की बात न हो, यह हो ही नहीं सकता।”

फिर प्रधानमंत्री मोदी ने छात्रों से सवाल किया, “… और अगर किसी के मन में लीडरशिप को लेकर कोई सवाल आता है, तो पूछें।” इस पर एक छात्र ने अनायास कहा, “कैसे बताऊं?”

प्रधानमंत्री ने भी हंसते हुए कहा कि जैसे मन करे, वैसे बताओ। प्रधानमंत्री की इस बात को सुनकर वहां मौजूद सभी छात्र हंस पड़े।

छात्र ने प्रधानमंत्री से सवाल किया, “जैसे हम क्लासरूम में मॉनिटर होते हैं और किसी को कहते हैं कि तुम नीचे बैठ जाओ, तो ऐसी स्थिति में हम उसे ये तो नहीं कह सकते हैं कि ‘न तुम बैठ जाओ, नहीं तो मैं तुम्हारा नाम लिख दूंगा’, तो ऐसी स्थिति में कोई तरीका है, जिससे कि हम उसे समझा सकें?”

इस पर प्रधानमंत्री ने उस छात्र को अच्छे लीडरशिप के गुण बताए। प्रधानमंत्री ने कहा, “लीडरशिप का मतलब हमेशा कुर्ता पजामा पहनना या मंच पर बड़े-बड़े भाषण देना नहीं होता है। आपको सबसे पहले खुद को एक उदाहरण बनाना होगा। अगर मान लीजिए कि समय पर आना है और ऐसी स्थिति में मॉनिटर ही कहेगा कि ‘आप लोग चले जाइए, मैं बाद में आऊंगा’, तो ऐसी स्थिति में मॉनिटर की बात कौन सुनेगा? अगर मान लीजिए कि किसी का होमवर्क नहीं हुआ, तो आप उसकी मदद कर सकते हैं। आप उसे कह सकते हैं कि ‘चलिए, मैं तुम्हारे होमवर्क करने में मदद करता हूं।’ आपके क्लास में पढ़ने वाले बच्चों को लगना चाहिए कि मॉनिटर मेरी मदद करता है, मुझे डांटता नहीं है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि लीडरशिप थोपी नहीं जाती है। अगर आप किसी को ज्ञान झाड़ देंगे, तो कोई आपको स्वीकार नहीं करेगा। आपका व्यवहार ऐसा होना चाहिए कि लोग आपको खुद स्वीकार करें।

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