Saturday, October 17, 2026

बिहार बाढ़ के लिए कांग्रेस नहीं जिम्मेदार, जेडीयू सत्ता में रहते करे समाधान: राजेश राम

तिरहुत न्यूज़ डेस्क (बिहार)। बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने बिहार में बाढ़ की स्थिति, वंदे मातरम को लेकर मचे विवाद, पी चिदंबरम की ‘दिमागी नक्सल’ टिप्पणी और पार्टी के भीतर अनुशासन समेत कई मुद्दों पर जदयू और भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा के बिहार की बाढ़ के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराने वाले बयान पर पलटवार करते हुए राज्य सरकार से बाढ़ नियंत्रण और गाद की समस्या पर काम करके दिखाने की चुनौती दी।

राजेश राम ने कहा कि जदयू लंबे समय से सत्ता में है और संजय झा स्वयं लंबे समय तक सिंचाई विभाग से जुड़े रहे हैं। यदि सरकार गाद और फरक्का को बाढ़ की समस्या की वजह मानती है तो इसका समाधान क्यों नहीं किया जा रहा? कोसी बराज और वाल्मीकि नगर बराज का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएं कांग्रेस के शासनकाल में बनी थीं। यदि कांग्रेस की नीतियों में कमी थी तो सरकार उन कमियों को दूर करे।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने राज्य में पुलों के गिरने की घटनाओं का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पुराने समय में बनाए गए कई पुल आज भी खड़े हैं, जबकि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में पुल गिरने की घटनाएं सामने आ रही हैं। उन्होंने सरकार से बाढ़, रोजगार, बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुद्दों पर जवाब देने की मांग की। राजेश राम ने आरोप लगाया कि सरकार इन मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए बार-बार नेहरू-गांधी परिवार का नाम लेती है। उन्होंने कहा कि सरकार को रोजगार और महंगाई पर चर्चा करनी चाहिए। साथ ही, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने चाहिए।

पी चिदंबरम की ‘दिमागी नक्सल’ टिप्पणी पर राजेश राम ने भाजपा पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुराने चुनावी वादों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 15 लाख रुपए देने, हर साल रोजगार उपलब्ध कराने और विदेश से काला धन वापस लाने जैसे वादों पर सवाल उठाना भी ‘दिमागी नक्सल’ है क्या? एसआईआर प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया के जरिए वोट चोरी की गई। सरकार को इन मुद्दों पर जवाब देना चाहिए।

दिल्ली में बिहार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और प्रभारी के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले पार्टी नेताओं पर कार्रवाई को लेकर राजेश राम ने कहा कि कई नेता लगातार पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन इसके बावजूद पार्टी के अंदर की बात सड़क पर ले जाकर प्रदर्शन किया गया। इस मामले में करीब छह नेताओं को नोटिस दिया जा चुका है और सोशल मीडिया समेत अन्य माध्यमों से फीडबैक लिया जा रहा है। लगभग 30 से 32 नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाना तय है। अनुशासन तोड़ने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

वंदे मातरम को लेकर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की टिप्पणी पर राजेश राम ने कहा कि यह कांग्रेस की ऐतिहासिक विरासत का हिस्सा है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कांग्रेस और उसके नेताओं ने इस गीत को महत्वपूर्ण स्थान दिया था। उन्होंने भाजपा और आरएसएस पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें कांग्रेस को देशभक्ति, तिरंगे और वंदे मातरम का पाठ पढ़ाने की जरूरत नहीं है। भाजपा नेताओं को कई बार राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान से जुड़े बुनियादी नियमों का पालन करते नहीं देखा गया।

उन्होंने आरएसएस और जनसंघ के पुराने रुख का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि संविधान निर्माण के दौर में उनके नेताओं ने तिरंगे के स्थान पर दूसरे विकल्पों की वकालत की थी। राजेश राम ने कहा कि कांग्रेस अपनी विरासत और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को लेकर किसी से प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं समझती। वंदे मातरम, जन गण मन और तिरंगा देश की राष्ट्रीय विरासत का हिस्सा हैं और इनका सम्मान सभी को करना चाहिए।

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